पाटोन्दा की ऐतिहासिक 161 साल पुरानी धरोहर अंतर्राष्ट्रीय ढाई कड़ी की रामलीला


इस ढाई कड़ी की रामलीला की शुरुआत आज से लगभग 161 वर्ष पहले गुरु साहब गणपतलाल दाधीच ने की थी उन्होंने रामलीला की भाषा को हाथ से लिखा था रामलीला की विशेषता है कि रामलीला में संवाद बोलने के लिए किसी भी गायक गायिका का सहयोग नहीं लिया जाता बल्कि कलाकार ही संवाद बोलते हैं। जिसे उन्होंने वाल्मीकि की रामायण और तुलसी की रामचरितमानस के आधार पर लिखा था।
इस रामलीला ने भारतीय रामायण मेला भोपाल अंतरराष्ट्रीय रामायण मेला चित्रकूट में दो बार और अंतरराष्ट्रीय रामायण मेला अयोध्या में एक बार प्रदर्शन किया है सन 1950 में कोटा में आयोजित अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन में भी इस रामलीला ने प्रथम स्थान हासिल किया था क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की ज्यूडिह मैरी पर्वों पर आधारित पुस्तक में एक अध्याय पाटोन्दा की ढाई कड़ी की रामलीला पर आधारित हैं |
ढाई कड़ी की रामलीला मंचन के वीडियो

28 अप्रैल 2024 (रविवार) [वैशाख कृष्ण पंचमी]

27 अप्रैल 2024 (शनिवार) [वैशाख कृष्ण चतुर्थी]

26 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [वैशाख कृष्ण तृतीया]

26 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [वैशाख कृष्ण तृतीया]

25 अप्रैल 2024 (गुरुवार) [वैशाख कृष्ण द्वितीया]

24 अप्रैल 2024 (बुधवार) [वैशाख कृष्ण प्रतिपदा]

23 अप्रैल 2024 (मंगलवार) [चैत्र शुक्ल पूर्णिमा]

22 अप्रैल 2024 (सोमवार) [चैत्र शुक्ल चतुर्दशी]

22 अप्रैल 2024 (सोमवार) [चैत्र शुक्ल चतुर्दशी]

20 अप्रैल 2024 (शनिवार) [चैत्र शुक्ल द्वादशी]

19 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [चैत्र शुक्ल एकादशी]
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रामलीला कार्यकारणी के कलाकार, वाद्य यंत्र वादक और सहयोगी सदस्य गण