रामलीला कार्यक्रम : 28 अप्रैल (रविवार), रात्रि में 10:30 बजे से अहिरावण वध, नारंतक वध, रावण वध, राज्य अभिषेक, महाआरती, रामलीला समापन
ढाई कड़ी की रामलीला पाटोन्दा
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गेलरी
ढाई कड़ी की रामलीला के वार्षिक आयोजित कार्यक्रम
चेत्र पंचमी को भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर से गणेश जी की छतरी तक लक्ष्मीनाथ जी के विमान के साथ सभी देवी देवता श्री गणेश जी को निमंत्रण पत्रिका देने जाते है और रामलीला में पधारने का आग्रह करते है।
राजा जनक को चिंतित देख गुरु विश्वामित्र ने राम को आज्ञा दी कि वह धनुष को उठाकर राजा जनक की चिन्ता और शंसय को दूर करें।
अष्टमी को श्री राम जी की बारात भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के प्रांगण से (रामलीला रंगमंच से) चलकर जानकी राय जी के मन्दिर (जनकपुरी) (मठ) तक जाती है ये परम्परा जो कि सालो से चली आ रही है ... तत्पश्चात श्री राम, लक्ष्मण, भरत एवम् शत्रुघ्न जी का विधि - विधान से विवाह संपन्न होता है।
दशमी को श्री राम जी की सेना भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के प्रांगण से (रामलीला रंगमंच से) चलकर लंका तक जाती है ये परम्परा जो कि सालो से चली आ रही है ... तत्पश्चात श्री राम द्वारा रावण दहन किया जाता है।
एकादशी से मुख्य रूप से रामलीला का मंचन रामलीला के रंगमंच पर किया जाता है।
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