ढाई कड़ी की रामलीला का मंचन चैत्र शुक्ल पंचमी से वैशाख पंचमी दिनांक : 13 अप्रैल से 28 अप्रैल तक होने जा रहा है।
पाटोन्दा। पाटोन्दा की ऐतिहासिक 161 साल से लगातार मंचित होती आ रही अंतर्राष्ट्रीय ढाई कड़ी की रामलीला का आयोजन चैत्र शुक्ल पंचमी से वैशाख पंचमी अर्थात दिनांक : 13 अप्रैल से 28 अप्रैल तक होने जा रहा है। यह रामलीला पन्द्रह दिनों तक आयोजित होती है।
इस रामलीला में तीन सवारियां निकाली जाती है। इसमें रामलीला के पहले दिन (13 अप्रैल 2024, शनिवार [चैत्र शुक्ल पंचमी]) को भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर से गणेश जी की छतरी तक लक्ष्मीनाथ जी के विमान के साथ सभी देवी देवता श्री गणेश जी को निमंत्रण पत्रिका देने जाते है और रामलीला में पधारने का आग्रह करते है।
रामलीला के चौथे दिन (16 अप्रैल 2024, मंगलवार [चैत्र शुक्ल अष्टमी]) दूसरी सवारी निकाली जाती है। जिसमे की श्री राम जी की बारात भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के प्रांगण से (रामलीला रंगमंच से) चलकर चलकर जानकी राय जी के मन्दिर (जनकपुरी) (मठ) तक जाती है ये परम्परा जो कि सालो से चली आ रही है ... तत्पश्चात श्री राम, लक्ष्मण, भरत एवम् शत्रुघ्न जी का विधि - विधान से विवाह संपन्न होता है।
रामलीला के छठे दिन (18 अप्रैल 2024, गुरुवार [चैत्र शुक्ल दशमी]) तीसरी सवारी निकाली जाती है। जिसमे की श्री राम जी की सेना भगवान श्री लक्ष्मीनाथ जी के प्रांगण से (रामलीला रंगमंच से) चलकर लंका तक जाती है ये परम्परा जो कि सालो से चली आ रही है ... तत्पश्चात श्री राम द्वारा रावण दहन किया जाता है।
चैत्र शुक्ल पंचमी से दशमी तक रामलीला लीला का मंचन मुख्य रूप से नही होता है | अतः भगवान राम के जन्म के पश्चात यानी कि एकादशी से मुख्य रूप से रामलीला का मंचन होता है।

ढाई कड़ी की रामलीला ने एक शानदार कलाकार को खो दिया। ढाई कड़ी की रामलीला के कर्मठ कर्तव्य निष्ठ प्रिय कलाकार सभी किरदारों (शबरी, केकेय, शूर्पणखा, मालन, लंकिनी, सुरसा, निषादराज, सखी) को सजीवता से मंचन करने वाले निस्वार्थ सेवाभावी से रामलीला के लिए काम करने वाले श्री धनराज जी भील का इस तरह इस उम्र में चले जाना, परिवार, समाज साथियों के लिए अपूरणीय क्षति, रामलीला के प्रति समर्पित, बहुत दुखद है। परलोक गमन पर भावपूर्ण श्रंद्धाजलि ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे 🙏🙏।
चैत्र शुक्ल पंचमी से दशमी तक रामलीला लीला का मंचन मुख्य रूप से नही होता है | अतः भगवान राम के जन्म के पश्चात यानी कि एकादशी से मुख्य रूप से रामलीला का मंचन होता है।
देवी देवता पूजन (दिन में 12 :15 से 4 :30 तक)
गणेश जी की सवारी (रात्रि में 9 बजे से)
पृथ्वी की पुकार, सकल देवताओं की पुकार, श्री राम जन्म लीला मंचन
विश्वामित्र जी द्वारा यज्ञ से धनुष यज्ञ, अहिल्या उद्धार
श्री राम बारात (अष्टमी की सवारी)
श्री राम जन्म उत्सव (दिन में 2 बजे से)लीला मंचन - सीता स्वयंवर, लक्ष्मण - परशुराम संवाद
रावण वध (दशमी की सवारी)
सीता स्वयंवर, लक्ष्मण - परशुराम संवाद
राज तिलक की तैयारी, राम वनवास
केवट प्रसंग, दशरथ मरण, श्रीराम - निषादराज मित्रता, श्रीराम - भरत मिलाप
विराध राक्षस वध, शूर्पणखा संवाद, सीता हरण, जटायु उद्धार
बाली द्वारा दुंदुभी वध, शबरी प्रसंग, राम - सुग्रीव मित्रता, बाली वध
सुग्रीव राज्याभिषेक, सुग्रीव द्वारा सीता की खोज, हनुमान - लंकिनी संवाद
हनुमान जी का लंका में प्रवेश, हनुमान - सीता संवाद, अशोक वाटिका उजाड़ना, जंबूमाली वध, अक्षय कुमार वध, लंका दहन
लंका की बढ़ाई, विभीषण शरणागत, लंका की चढाई, सेतु निर्माण, अंगद - रावण संवाद
लक्ष्मण शक्ति, कुम्भकरण वध, मेघनाथ वध, सुलोचना सती
अहिरावण वध, नारंतक वध, रावण वध, राज्य अभिषेक, महाआरती, रामलीला समापन
बृजसुंदर केवट, रामप्रसाद सेन, लोकेश दाधीच, हंसराज मालव, रामेश्वर कटारिया, नाथूलाल कारपेंटर, चोथमल गोचर, सुशिल पांचाल, वेद प्रकाश शर्मा, मुकुट गुर्जर, रामसिंह केवट, संदीप शर्मा, रामप्रसाद मेहरा, देवीशंकर मालव, दीनबंधु केवट, हेमंत सेन, कृष्ण मुरारी मालव, अमरलाल मालव, देवकी नंदन शर्मा, इन्द्रजीत केवट, अमृतलाल रावल, सज्जन रावल, कपिल रावल, श्रवणलाल प्रजापति,भंवरलाल नागर, धर्मवीर कटारिया, रविन्द्र नागर, चेतन नागर, भारत नागर, अनिल नागर, विनोद मालव, मोहित वैष्णव, हेमंत नंदवाना, गौरव नंदवाना, महेश केवट, नरेन्र्द केवट, रामभरोस केवट
28 अप्रैल 2024 (रविवार) [वैशाख कृष्ण पंचमी]
27 अप्रैल 2024 (शनिवार) [वैशाख कृष्ण चतुर्थी]
26 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [वैशाख कृष्ण तृतीया]
26 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [वैशाख कृष्ण तृतीया]
25 अप्रैल 2024 (गुरुवार) [वैशाख कृष्ण द्वितीया]
24 अप्रैल 2024 (बुधवार) [वैशाख कृष्ण प्रतिपदा]
23 अप्रैल 2024 (मंगलवार) [चैत्र शुक्ल पूर्णिमा]
22 अप्रैल 2024 (सोमवार) [चैत्र शुक्ल चतुर्दशी]
22 अप्रैल 2024 (सोमवार) [चैत्र शुक्ल चतुर्दशी]
20 अप्रैल 2024 (शनिवार) [चैत्र शुक्ल द्वादशी]
19 अप्रैल 2024 (शुक्रवार) [चैत्र शुक्ल एकादशी]